13 अप्रैल 2020 - 14:01
कोरोना वायरस, संक्रमित किए बग़ैर भी कैसे ले रहा है भारतीयों की जान, कोरोना के मरीज़ों को तरजीह के चलते नज़रअंदाज़ हो गए हैं कैंस

गंभीर रूप से बीमार शाहजहां के घरवालों के पास कोई रास्ता नहीं बचा, उन्हें अस्पताल से बीमार को वापस ले जाना पड़ा क्योंकि कोरोना के बीमारों के इलाज के लिए अस्पताल को उनके बेड की ज़रूरत थी।

फेफड़ों में गंभीर रूप से इन्फ़ेक्शन हो जाने के कारण 40 साल की बीमार को वेंटीलेटर पर रखा गया था मगर उन्हें लोक नाइक अस्पताल से जाना पड़ा। किसी और अस्पताल ने भी उन्हें भर्ती नहीं किया और अगले ही दिन घर में शाहजहां की मौत हो गई। शाहजहां के रिश्तेदार मुहम्मद ख़ालिद कहते हैं कि उन्हें एम्बूलेस भी नहीं दी गई।

यह हाल दिल्ली ही नहीं दूसरे भी शहरों के अस्पतालों का है वहां भी कैंसर और दूसरे घातक रोगों से जूझ रहे बीमारों को समस्याओं का सामना है, अस्पतालों ने अन्य बीमारों के लिए अपने रास्ते बंद कर लिए है।

एक बीमार का कहना है कि अब तो टाइम पर खाना भी नहीं मिल पा रहा है।

सरयूदास नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि 12 घंटे हो गए हैं और अब तक कुछ खाने को नहीं मिला है। सरयूदास के बेटे को कैंसर था जिसकी मौत हो गई। बिस्तर पर उसका मृत शरीर पड़ा था। कपड़ा ढंका हुआ था और मक्खियां भिनभिना रही थीं। देश के अस्पतालों में कोरोना वायरस की वजह से अपातकाल की स्थिति है।

मध्य प्रदेश की कार्यकर्ता अमूल्या निधी का कहना था कि बहुत से बीमार टीबी औ फेफड़े के इंफेक्शन जैसे रोगों से जूझ रहे हैं, सरकार को इन हालात की जानकारी थी लेकिन सरकार ने बिना किसी तैयारी के लाकडाउन की घोषणा कर दी। कार्यकर्ता का कहना है कि उन्हें देश के विभिन्न भागों से फ़ोन काल आ रही हैं कि लोगों को दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। उनका कहना है कि कोरोना से लड़ने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की ज़रूरत है लेकिन दूसरी बीमारियों से जूझ रहे रोगियों के लिए भी ज़रूरी सुविधाओं का बंदोबस्त होना चाहिए।

विनय शेट्टी मुंबई में चिकित्सा विभाग के कार्यकर्ता हैं और रक्तदान के शिविर लगाते हैं। उनका कहना है कि जिस बीमार को भी आजकल ख़ून की ज़रूरत पड़ जाती है वह बड़ी मुशकिल में फंस जाता है।

अनंत भान का कहना है कि सरकार पूरी तरह कोरोना से संघर्ष पर अपना ध्यान केन्द्रित किए हुए है लेकिन इस बीच टीबी जैसे रोग पूरे देश में फैल सकते हैं। लाक डाउन के कारण वह परिवार गंभीर ख़तरे में हैं जिनके यहां कोई टीबी का मरीज़ है। एसे घरों में हो सकता है कि टीबी भी उसी तरह फैल जाए जैसे कोरोना वायरस फैल रहा है।

रामपुर ज़िले के एक कैंसर रोगी ने कहा कि लाक डाउन की वजह से उसकी केमोथेरैपी नहीं हो पा रही है।

स्रोतः अलजज़ीरा डाट नेट